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इंडिया लॉग बुक

रेलवे स्टेशन पर एक सुबह

काम की दौड़ और भागमभाग...अगर इसे सटीक तौर पर देखना है तो रेलवे स्टेशन से बेहतर जगह शायद और कोई नहीं हो सकती है. कोई ट्रेन रूकने के साथ ही दौड़ा जा रहा है तो कोई चुपचाप अपनी मंजिल की तरफ बढ़ता जा रहा है. किसी के हाथ में सामान का बोझा है, कंधों पर एक भारी बैग तो लटका ही रखा है तो साथ में धर्मपत्नी ने दूसरे कंधे पर दो और बैग दे दिया है, भीड़ में बच्चा खो ना जाए तो मम्मी भी अपने लाड़ले की उंगली कसकर पकड़ रखी है, बुज़र्ग महिलाएं भी धीरे-धीरे कदम बढ़ाती आगे बढ़ती है, ऐसे कई नज़ारे प्लेटफॉर्म पर नज़र आते रहते हैं. यानी रेलवे प्लेटफॉर्म  हमेशा जीवंत रहता है जिसपर हर पल ज़िंदगी की गाड़ियां दौड़ती रहती हैं.

जूनून से सफलता तक

व्हीलचेयर से आगे हौसले की उड़ान

हर कोई बाबा की शरण में...नेता से लेकर अभिनेता तक

बाबा के भक्तों... कुछ तो अक्ल लगाओ..

फ्रेंडशिप डे पर अर्ज किया है...

जियोफोन से 50 करोड़ उपभोक्ता बाज़ार पर रिलायंस की नज़र

सब चलता है... शराबबंदी भी और शराबखोरी भी...

आधुनिक समय में ज़िंदा हुई पुरातन परंपराएं...

ट्रेलर ऐसा है तो फिल्म कैसी होगी?

एक शाम चांदनी चौक की गलियों के नाम..

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शर्म भी, गुस्सा भी.. आखिर कब तक?

राजनीति का थप्पड़ कांड

स्वच्छता में कौन निकला सबसे आगे...

मेरा मसालेदार खाना कहां गया?..

राजधानी के दिल में पायरेसी का स्वर्ग

गौ-तस्करी से उपर.. क्या गायों को मिलेगा सहारा?