Posts

मेरा मसालेदार खाना कहां गया?..

आपने महानगरों में ये नज़ारा तो खूब देखा होगा, ऑफिस में जब भी लंच टाइम होता है वैसे ही कुछ लोग कैंटीन का रुख ना करके ऑफिस के बाहर जाना ज्यादा पसंद करते हैं. बाहर भीड़ लगी होती है. लोग छोले चावल, बिरयानी, राजमा चावल, छोले भटूरे, फ्रूट चाट, कुल्चे छोले, दही भल्ला की कतार में खड़े होते हैं. फटाफट अपने पसंद का भोजन किया और वापस ऑफिस में जाकर काम पर लग गए. अब काम तो सभी करते हैं और भूख भी सभी को लगती है. तो ऐसे में कैंटीन के नीरस उबले हुए बेस्वाद खाने से बेहतर इंडियन स्टाइल में मसालेदार, तीखा और चटपटा खाना मिल जाये तो क्या कहने. बस अपने पसंद का खाना खा लेने भर से ही बॉस की डांट का आधा असर तो कम हो ही जाता है. 
वैसे, महानगरों में लंच टाइम में दिखने वाले इस नज़ारे में अब थोड़ा थोड़ा बदलाव आ रहा है. आम तौर से भारतीय खाना बेचने वाले परंपरागत शैली के स्टॉल के साथ साथ पाश्चात्य देशों से प्रभावित फूड ट्रक आ गए हैं. ये भी खाना खिलाते हैं एकदम साफ सुथरा, गंदगी की कहीं भी गुंजाइश नहीं, अच्छे से कपड़े भी पहने होते हैं. आम तौर पर ये भोजन से भरी अपनी गाड़ियों को बड़े-बड़े ऑफिस कॉम्प्लेक्स के बाहर खड़ा क…

राजधानी के दिल में पायरेसी का स्वर्ग

गौ-तस्करी से उपर.. क्या गायों को मिलेगा सहारा?

सड़कों पर बच्चों का दम घुट रहा था..

योगा से ही होगा...

सूनापन...

क्या होगा इन बच्चों का...

NDTV पर बैन - आपातकाल की आहट !

ऐसे कम होगा दिवाली पर जानलेवा प्रदूषण

... खो गई हूं मैं

रियो ओलंपिक: क्या खोया क्या पाया?

रियो ओलंपिक: आगाज से भारत की उम्मीदों तक

ख्वाहिशें

कहीं पीछे ना छूट जाए...

क्या कूल हैं हम - मनोरंजन या फिर.. ?

न्यूज चैनलों का सीसीटीवी तमाशा