योगा से ही होगा...



ये एक अनोखा नज़ारा था.. रविवार सुबह आंख खुली तो, देखा कि दरवाजे के बाहर सोसायटी के लॉन में बच्चे मज़े से योग कर रहे थे. एक बुज़ुर्ग महिला बच्चों को योग के आसन के बारे में बता रही थीं. सबके चेहरों पर खिलखिलाहट, मस्ती और कुछ नया सीखने की उमंग थी. बच्चों में होड़ लगी थी, कौन किससे बेहतर योग करता है. किसे शाबासी मिलती है और किसे घुड़की. थोड़ी देर में कुछ और बच्चे पहुंच गए. कोई चादर लेकर आया तो कोई योगा मैट. जल्दी से अपने दोस्तों के पास जगह ढूंढी, थोड़ी ठिठोली की और बस शुरू हो गए.


इस बात में कोई संदेह नहीं कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर  हर साल 21 जून को योग दिवस मनाने की कोशिश का फायदा दो-तीन साल के अंदर ही दिखने लगा है. भारत सरकार योग को लोकप्रिय बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है. आयुष मंत्रालय की वेबसाइट पर जाकर तो कोई भी योग को अपनी जीवन शैली में शामिल होने की शपथ ले सकता है. इसके लिए उसे अपना नाम और ईमेल आईडी की जानकारी देनी होगी, फोटी भी अपलोड करने का विकल्प है. एक अनुमान के मुताबिक, दुनिया भर में  करीब 175 देश अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के दिन सामूहिक योग कार्यक्रमों को बढ़ावा दे रहे हैं. हालांकि योग को लेकर कई मुस्लिम देशों ने सकारात्मक रवैया अपनाया है. लेकिन, भारत में कुछ समुदायों ने योग की सूर्य नमस्कार को लेकर गहरा विरोध जताया है, जो साफ तौर पर महज विरोध करने की भावना से प्रेरित लगता है. इस तथ्य से कोई इंकार नहीं कर सकता है कि अफगानिस्तान, बांग्लादेश, टर्की, संयुक्त अरब अमीरात, इंडोनेशिया, इरान, कतर, ओमान जैसे 47 मुस्लिम देशों ने संयुक्त राष्ट्र संघ में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाए जाने का समर्थन करके 5000 साल पुरानी पद्धति में अपना विश्वास जताया था. 


ख़ैर, विवाद अपनी जगह है, इसे रोका नहीं जा सकता. लेकिन, एक बात तय है कि जिस तरह से मेट्रो शहरों से लेकर गांव -कस्बों में योग करने को लेकर छोटे-बड़े ग्रुप बन गए हैं जो सचमुच एक अच्छे और स्वस्थ भविष्य की ओर इशारा कर रही है.