सड़कों पर बच्चों का दम घुट रहा था..

रासायनिक हमले में मौत की नींद सो चुके अपने दो मासूम बच्चों के साथ एक पिता
ये एक ऐसी तस्वीर है जिसे देखकर कलेजा मुंह को आ जाये. एक बाप अपने दो बच्चों को कलेजे से चिपकाये जार-जार बिलख रहा है. दोनों बच्चे बेजान हैं. सफेद कपड़ों में लिपटे हैं. आसपास लोग हैं लेकिन किसी की हिम्मत नहीं कि उसे चुप करा सके. इस तस्वीर को देखकर आप आसानी से अंदाजा लगा सकते हैं कि कितना मुश्किल होगा इस बाप के लिए अपने ही बच्चों के जनाजे को उठाना.
सीरिया के शहर इडलिब के एक कस्बे में चार केमिकल बम गिराए गए थे
इराक, टर्की, लेबनान और जॉर्डन की सीमाओं से घिरे सीरिया में ज़बरदस्त गृह युद्ध छिड़ा है. राष्ट्रपति बशर अल असद की रुस समर्थक सेना विद्रोहियों से लंबी लड़ाई लड़ रही है. इसी लड़ाई में बशर की सेना ने इडलिब प्रांत के खान शयखुन कस्बे में रासायनिक हथियार गिरा दिए. इसके बाद जो हुआ उसकी कल्पना शायद इस इलाके में किसी ने नहीं की होगी. रासायनिक हथियारों से ऐसी दमघोंटू जलन पैदा हुई कि बच्चे, बूढ़े, जवान सड़कों पर, गलियों में, घरों में गिरकर बेदम होने लगे. सांस लेने में परेशानी होने लगी, हर तरफ लोगों की चीख पुकार मच गई. मासूम बच्चे सड़कों पर छटपटाने लगे. किसी तरह लोगों को अस्पताल ले जाया गया. लेकिन, करीब 80 लोग केमिकल अटैक में मारे गए, जिसमें कई बच्चे भी थे. इन्हीं बच्चों में से कफन में लिपटे अब्दुल हामिद यूसूफ का बेटा अहमद और बेटी अया भी थी. इस हादसे में यूसूफ ने अपने परिवार के 20 लोगों को हमेशा के लिए खो दिया.
रूस ने कहा कि राष्ट्रपति बशर की सेना ने अपने लोगों पर केमिकल हथियारों से अटैक नहीं किया. उन्होंने तो विद्रोहियों के ठिकानों को निशाना बनाया था. इसे बहाना बनाकर अब अमेरिका ने भी सीरिया पर हमला कर दिया है. वो सीरिया के एयरबेस को निशाना बना रहा है. अब ये लड़ाई कहां तक जायेगी इसके बारे में नहीं कहा जा सकता. क्योंकि, एक ओर अमेरिका कह रहा है कि उसने रासायनिक हमले के खिलाफ जंग छेड़ी है. दूसरी तरफ रूस का कहना है कि राष्ट्रपति बशर का रासायनिक हथियारों के गिराए जाने से कोई लेना-देना नहीं है. जाहिर है दो गुट अपने आपको सही ठहरा रहे हैं और एक दूसरे पर हमले कर रहे हैं, जो आने वाले दिनों में और तेज़ होंगे. इन सबके बीच पिस रहे हैं सीरिया के वो लोग जिन्हें इससे कोई मतलब नहीं है. वो अपने घरों में शांति से रहना चाहती है, अपने बच्चों को हंसते-खेलते देखना चाहती है, उन्हें बड़े होकर ज़िदगी जीते हुए देखना चाहती है, ना कि, बाप की बांहों में दम तोड़ते देखना चाहती है. 
सीरिया के केमिकल अटैक में मारे गए दोनों बच्चे अया और अहमद