ट्वीट वॉर... दे दनादन ट्वीट

कुछ सालों से एक नई किस्म की लड़ाई हर वक्त छिड़ी रहती है. ये लड़ाई आमने सामने नहीं होती है और ना ही इसमें लात-घूंसे चलते हैं. बल्कि ये लड़ाई होती है वर्चुअल स्पेस में. इसी में जूतमपैजार होती है, मिट्टीपलीद होती है, कालिख भी पोती जाती है, तो जीत का सेहरा भी बांध दिया जाता है. लड़ाई के इस शक्तिशाली मंच का नाम है ट्विटर. वैसे फेसबुक भी है, लेकिन वो दूसरे टाइप का है, उसकी पहुंच सामान्य जन तक ज्यादा है तो उसका इस्तेमाल प्रोपेगैंडा वॉर के लिए खूब होता है. लेकिन ट्विटर की तो बात ही अलग है. 140 शब्दों की लिमिट और इसी सीमा में सारा खेल हो जाता है. बड़े-बड़े लोग ट्विट करते हैं और दनादन करते हैं. अजी, अब पहले वाला वक्त कहां रह गया जब कोई बात कहने के लिए प्रेस कांफ्रेंस करना पड़ता था. अब तो बस दो-चार ट्वीट कर दिए, फिर उसके बाद देखिए कैसे शुरू होता है बवाल. जिसने ट्वीट किया उसे ट्रोल किया जाने लगेगा, यानी कि पक्ष वाले जहां उसकी बात का समर्थन करेंगे वहीं विपक्ष वाले खटिया खड़ी करना शुरू कर देंगे.

बड़े-बड़े नेताओं से लेकर अभिनेताओं तक के ट्विटर अकाउंट हैं. सुबह उठने से लेकर रात के सोने तक वो ट्विटर पर सक्रिय रहते हैं. हर छोटी-बड़ी बात अपने चाहने वालों से शेयर करते हैं. अब किस ट्वीट को किस वक्त शेयर करना है इसकी टाइमिंग भी बेहद ज़रूरी होती है. मसलन, नेता अपने विरोधी पर अमूमन उस समय ट्ववीट वॉर छेड़ता है जब या तो उसकी कोई सुन नहीं रहा होता है या फिर किसी मसले को टाइमिंग देखकर धुंआ देना होता है. अभिनेता भी ट्विट करते वक्त टाइमिंग का खास ख्याल रखते हैं. अब जब फिल्म रिलीज होने वाली होती है तब ऐसी कई विवादित ट्ववीट की बाढ़ आ जाती है. उसके बाद सफाई और बहस का दौर शुरु हो जाता है और फिल्म को बैठे-बिठाए प्रमोशन मिल जाता है. कुछ लोग वैसे भी होते हैं जो हर वक्त ट्वीट करते रहते हैं और अपने आपको खबरों में बनाए रखते हैं. ऐसे ही एक हैं रिटायर जज मार्कंडेय काटजू साहब. ये अपने ट्वीट को लेकर कई बार विवादों में पड़ चुके हैं. लेकिन साहब हैं कि बाज़ ही नहीं आते हैं. खैर, पेश है कुछ विवादित ट्वीट.